Sunday, May 8, 2011

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आज कुछ अच्छा नहीं लग रहा, 
ज़िन्दगी एक नए मोड़ पे आ खड़ी है,
एक तरफ family, एक तरफ career,
तो एक तरफ दूर होते दोस्तों से जुडी है,
सब अपनी अपनी राहों में निकल रहे हैं,
जा रहे हैं, अपनी मंजिल की ओर,
और मैं आज एक लकीर पे खड़ा हू...
नहीं पता के जाना है इस डोर् या उस डोर,
अपनी ज़िन्दगी से कुछ वायदे किये हैं,
और कुछ वायदे किये हैं खुद से...
ज़ंजीरो की तरह बंधी हैं येह दोनों पाओ में...
खिच् रही है दो दिशाओ में,
कस्ती जा रही है, कस्ती जा रही है,
पर शायद... जान्ता हूं मैं के क्या सही है,
कुछ चीज़ें जो मैं शायद कभी बदल ना सकूं,
कुछ चीज़ें जो मैं शायद कभी समझा ना सकूं,
और शायद अपनी ज़िन्दगी में कभी कुछ लोगो को वापस पा ना सकूं,
आज फिर एक बार दिल की सुन्ने को जी चाहता है,
शायद आज दिल कहीं इस बात को जानता है,
"के शोहरत के दिन फिर आएँगे,
के तेरा मुकाम कहीं और है.
अपनों से दूर तू ना जा,
हर वक़्त कि बात कुछ और है.
सब पाया तूने जिन्के साये में,
उन्से बड़ा आज कौन और है"

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